चंदौली में ट्रकों से हो रही अवैध उगाही के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पूर्वांचल ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि इस पूरे नेटवर्क की असली कड़ी अब तक जांच के दायरे से बाहर है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन को पत्र भेजकर एआरटीओ सर्वेश गौतम को भी आरोपी बनाने और चार्जशीट में नाम जोड़ने की मांग की है।
मामले की पृष्ठभूमि
11 मार्च 2026 को चंदौली पुलिस ने ओवरलोड वाहनों को गुजरने देने के एवज में पांच हजार रुपये की अवैध वसूली के आरोप में परिवहन दल के एक सिपाही, दुर्गा श्रीवास्तव, को गिरफ्तार किया था। एसोसिएशन का कहना है कि गिरफ्तारी का आधार बनी ऑडियो रिकॉर्डिंग में सिर्फ सिपाही की ही नहीं, बल्कि एआरटीओ सर्वेश गौतम और शिकायतकर्ता सुनील यादव के बीच हुई बातचीत भी दर्ज है — और यही हिस्सा जांच से बाहर रखा गया।
“सिपाही सिर्फ मोहरा था” — एसोसिएशन का दावा
एसोसिएशन के अनुसार वसूली का असली लाभार्थी सिपाही नहीं, बल्कि ऊपर के अधिकारी थे:
- सिपाही को वसूली की रकम का बेहद छोटा हिस्सा ही मिलता था।
- करीब 80 प्रतिशत रकम सीधे एआरटीओ सर्वेश गौतम तक पहुंचती थी।
- ऑडियो में कथित तौर पर एक व्यक्ति, “आसिफ”, का नाम भी रकम पहुंचाने के संदर्भ में सामने आया है।
विवेचक की भूमिका पर भी सवाल
एसोसिएशन ने जांच अधिकारी (सीओ सदर, जौनपुर) पर भी लीपापोती का आरोप लगाया है। पत्र में कहा गया है कि उपलब्ध ऑडियो साक्ष्यों को जानबूझकर दरकिनार कर एआरटीओ को बचाने की कोशिश की गई। एसोसिएशन का दावा है कि कार्रवाई न होने से आरोपी अधिकारी बेखौफ हैं और परिवहन कार्यालय, चंदौली में वसूली का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इसकी पुष्टि के लिए कार्यालय के बाबू जितेंद्र सरोज और कुछ अन्य बिचौलियों की बातचीत के ऑडियो का भी हवाला दिया गया है।
प्रशासन से अपील
पत्र में अपराध संख्या 0097/2026 की दोबारा विवेचना कराने और मौजूद ऑडियो साक्ष्यों के आधार पर सर्वेश गौतम का नाम चार्जशीट में शामिल करने की मांग की गई है। इस पत्र की प्रतियां प्रमुख सचिव (परिवहन) और परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) को भी सूचनार्थ भेजी गई हैं।
