वाराणसी। सरकारी नौकरी की चाह में लाखों रुपये देकर परीक्षा पास कराने का सपना दिखाने वाला एक संगठित रैकेट रविवार को उत्तर प्रदेश एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया। मौका था सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा का, जिसमें अभ्यर्थियों को छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से जवाब भिजवाए जा रहे थे। एसटीएफ की मुस्तैदी से यह पूरा खेल बीच में ही रुक गया और गैंग के 13 सदस्य सलाखों के पीछे पहुंच गए।
भनक लगते ही बिछाया गया जाल
पिछले कुछ दिनों से एसटीएफ को इस बात के संकेत मिल रहे थे कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाने के लिए एक गिरोह सक्रिय है, जो मोटी फीस के बदले माइक्रो डिवाइस के जरिए उत्तर भेजने का “ठेका” लेता है। इसी सुराग को आगे बढ़ाते हुए निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, निरीक्षक राघवेन्द्र मिश्र और उपनिरीक्षक आलोक सिंह की अगुवाई में अलग-अलग टीमें उतारी गईं — एक टीम प्रयागराज में डटी रही तो बाकी दो टीमें वाराणसी में निगरानी करती रहीं।
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस पूरे नेटवर्क की कमान गैंग सरगना शिवजीत पटेल और उसके भाई कप्तान सिंह पटेल के हाथों में है, और दोनों अपने गुर्गों के साथ शहर के दो परीक्षा केंद्रों के आसपास ही मौजूद हैं। सूचना पक्की होते ही एसटीएफ ने बिना देर किए दोनों जगह दबिश दी और पूरे गिरोह को दबोच लिया।
किसे-किसे मिली हिरासत
छापे में प्रयागराज और प्रतापगढ़ के रहने वाले कुल 13 लोग पकड़े गए —
- कप्तान सिंह पटेल
- ओम प्रकाश पटेल
- राकेश कुमार पटेल
- रविकान्त वर्मा उर्फ अखिलेश
- धर्मेन्द्र कुमार सिंह
- लालता प्रसाद उर्फ गुड्डू
- अनुज कुमार पाल
- शिव प्रकाश पटेल (प्रयागराज)
- मनोज कुमार
- विपिन कुमार वर्मा
- धर्मेन्द्र कुमार
- चन्दर
- दीपक पटेल
सामान भी बरामद, तरीका भी आया सामने
तलाशी में टीम के हाथ 11 मोबाइल फोन, 4 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, 2 प्रिंटर, 2 प्रवेश पत्र, 2 प्रश्नपत्र और 2 ओएमआर शीट लगीं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सरगना शिवजीत पटेल अभ्यर्थियों को नौकरी पक्की कराने का भरोसा देकर उनसे भारी रकम ऐंठता था।
इसी कड़ी में गिरफ्तार अभ्यर्थी धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि उसने कप्तान सिंह पटेल के खाते में 3.75 लाख रुपये भेजे थे और ऊपर से 1.25 लाख रुपये नकद भी दिए थे। एक और अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा ने तो सीधे 5.25 लाख रुपये चुका दिए। गैंग में काम भी बंटा हुआ था — दीपक पटेल और राजेन्द्र यादव उर्फ धीरेन्द्र यादव डिवाइस मुहैया कराने का जिम्मा संभालते थे, जबकि प्रश्नपत्र हाथ लगते ही उसे तुरंत सॉल्वरों तक पहुंचा दिया जाता था ताकि जवाब समय पर वापस भेजे जा सकें।
मामला दर्ज, दो अब भी फरार
गिरफ्तार सभी आरोपियों पर थाना सिगरा में मुकदमा अपराध संख्या 300/2026 और कोतवाली वाराणसी में मुकदमा अपराध संख्या 170/2026 के तहत उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।
हालांकि छापेमारी के दौरान मची भगदड़ का फायदा उठाकर सरगना शिवजीत पटेल और उसका साथी राजेन्द्र यादव उर्फ धीरेन्द्र यादव मौके से निकल भागे। दोनों फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है, और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
