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जय श्री कृष्णा फाउंडेशन का सेवा अभियान: 500 से अधिक कंबल व ऊनी वस्त्र वितरित, गांववासियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

वाराणसी/मिर्ज़ापुर रोड। नए वर्ष और नए सत्र की शुरुआत को सेवा और मानवता के संदेश के साथ चिह्नित करते हुए जय श्री कृष्णा फाउंडेशन द्वारा रविवार, 4 जनवरी को एक सराहनीय सामाजिक पहल की गई। “दिखावा नहीं, दिल से सेवा” के संकल्प के साथ कड़ाके की ठंड में जरूरतमंदों तक राहत पहुँचाने के लिए गांव में कंबल एवं ऊनी वस्त्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सिगरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर, आदर्श नगर पंचायत क्षेत्र (न्यू पोस्ट ऑफिस कछवा बाजार, मिर्ज़ापुर रोड, राजातालाब के आगे) स्थित गांव में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान 500 से अधिक कंबल, रजाई, मोजे, मफलर, टोपी सहित अन्य ऊनी वस्त्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में करीब 500 गांववासियों की उपस्थिति रही, जिनके चेहरों पर ठंड से राहत मिलने की खुशी साफ दिखाई दी।

सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और सामाजिक समरसता

कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजकों ने बताया कि मानवता की सेवा ही जीवन का सर्वोत्तम कार्य है और इसी भावना के साथ यह पहल की गई।

विशिष्ट सानिध्य और अतिथियों की उपस्थिति

इस सेवा अभियान को श्री सोहनलाल जी माली (राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार) का सानिध्य प्राप्त हुआ। उनके मार्गदर्शन और उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष प्रेरणा मिली।

विशेष वर्गों के लिए अलग सेवा

फाउंडेशन द्वारा कैंसर पीड़ित 60 बच्चों व उनके केयरटेकर, साथ ही 15 दिव्यांगजनों के लिए अलग से कंबल सेवा प्रदान की गई, जिसकी स्थानीय स्तर पर व्यापक सराहना हुई।

सहयोगियों का योगदान

कार्यक्रम संयोजकों प्रदीप मल्होत्रा, अनूप केशरवानी, युक्ति गुप्ता, डॉ. किरण कौशिक, पल्लवी राकेश राजपूत, उषा अग्रवाल, रविंद्र राय, रितेश अग्रवाल सहित सभी स्वयंसेवकों की भूमिका सराहनीय रही।
गांव स्तर पर अवनीश त्रिपाठी एवं उनके साथियों का विशेष सहयोग मिला।
कंबल सहयोगियों—संजीव अग्रवाल, अरविंद जैन, बृजेश दास लोड, दिव्या राकेश अग्रवाल, विनय गिरी, ऋषि जायसवाल, सीमा श्रीवास्तव, डॉ. ए. के. कौशिक, डॉ. वीरेंद्र केसरी—का भी आयोजकों ने आभार व्यक्त किया।

जय श्री कृष्णा फाउंडेशन ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी सहयोगियों का हृदय से धन्यवाद, अभिनंदन और नमन किया। आयोजन का संदेश स्पष्ट था—सेवा, समर्पण और करुणा के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुँचाना।

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